सागर की लहरें (डॉ. वीरसागर जैन) | Sagar Ki Laharen

सागर की लहरें
( कविता-संग्रह )

प्रो. वीरसागर जैन

अनुक्रमणिका

  1. प्राकृत-काव्य
    1. बाहुबलि-स्तुति
    1. बाहुबलिस् पूअण
    1. आरदी बाहुबलि सामिणो
    1. देव-सत्थ-गुरु-वंदणा
    1. अरिहंते तुह जुणणो (लोरी)
  2. संस्कृत-काव्य
    1. नित्यं ध्यायन्ति योगिनः
    1. प्रकीर्णिकाः
    1. मोह-वर्णनम्
  3. हिन्दी-काव्य
    1. महावीराष्टक स्तोत्र
    1. पार्श्वनाथ-पूजा
    1. भरत-स्तुति
    1. तत्त्वज्ञान दोहावली
    1. जिनवाणी अमृतवाणी
    1. छोटा-सा मन्दिर बनाएँगे
    1. कल मैंने इक सपना देखा
    1. जीवन में करिये तप पाप
    1. पयोनिधि विषयों से बचना
    1. तुम नित्य निरन्तर भजन करो
    1. पहले मन से तोलो / चोट्टी
    1. उस पर कोई ध्यान न दो
    1. एक कैरेट की अभिलाषा
    1. हम करते हैं तो क्या हुआ
    1. सब ऐसे बनाते भगवान्
    1. आत्मा का हित होगा
    1. आत्म-परिचय
    1. चिन्तागम
    1. छायानुवाद (प्राकृत-संस्कृत-काव्यों का)
    1. जिनवाणी शतक (मुक्तक-संग्रह)

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