साधु दशा प्रगटायेंगे, सिद्ध दशा प्रगटायेंगे | Sadhu Das Pragatayemge Siddh Das Pragatayemge

तर्ज : चाह जगी मोहि…

साधु दशा प्रगटायेंगे, सिद्ध दशा प्रगटायेंगे । ।टेक ।।

स्वयं सिद्ध ध्रुव परमातम, परमानन्दमय शुद्धातम।
अन्तर्मुख हो ध्यायेंगे।।।।।
ज्ञान सुख नहीं है पर में, अपनी प्रभुता अपने में।
पर से चित्त हटायेंगे । ।2।।
होय विरागी परिग्रह छोड़, इन्द्रिय-विषयों से मुख मोड़।
गुरु चरणों में जायेंगे।।3।।

हर्ष सहित निर्ग्रन्थपद धार, मूलोत्तर गुण सहज सम्हार।
ज्ञायक भाव सु भायेंगे । ।4 ।।
उपसर्गों में अचल रहें, परीषहों में अडिग रहें।
सकल विभाव नशायेंगे।।5।।

कर्म कलंक समूल नशाय, अनुपम आतम गुण विकसाय।
अक्षय प्रभुता पायेंगे।।6।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’
स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु, पृष्ठ २२४