तर्ज : सुमर सदा मन …
सबसे सुन्दर आतमराम, अक्षय सुखमय आतमराम।
स्वयंसिद्ध प्रभु आतमराम, ध्रुव परमेश्वर आतमराम ।।1।।
अनन्य शरण है आतमराम, नित्य शरण है आतमराम ।
निष्कल निर्मल आतमराम, अजर अमर है आतमराम ।।2।।
सहज पूर्ण है आतमराम, सदा पूर्ण है आतमराम।
अद्भुत प्रभुतामय अभिराम, शक्ति अनंतमयी गुणधाम ।।3।।
परम ज्योतिमय आतमराम, ब्रह्म स्वरूप सु-आतमराम।
परम पवित्र सहज निष्काम, नित्य मुक्त प्रभु आतमराम।।4।।
समयसार है आतमराम, नियमसार है आतमराम ।
प्रवचनसार है आतमराम, परमसार है आतमराम ।।5।।
सहज समाधि स्वरूप ललाम, निर्विकल्प हो करूँ प्रमाण।
हो अनुभूति सु आठों याम, आतमराम मैं आतमराम।।6।।
स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’