रे भाई! करुना जान रे
रे भाई! करुना जान रे ॥टेक॥
सब जिय आप समान हैं रे, घाट बाध नहिं कोय ।
जाकी हिंसा तू करै रे, तेरी हिंसा होय ॥
रे भाई! करुना जान रे ॥१॥
छह दरसनवाले कहैं रे, जीवदया सरदार ।
पालै कोई एक है रे, कथनी कथै हजार ॥
रे भाई! करुना जान रे ॥२॥
आधे दोहे में कहा रे, कोटि ग्रंथ को सार ।
परपीड़ा सो पाप है रे, पुन्य सु परउपगार ॥
रे भाई! करुना जान रे ॥३॥
सो तू परको मति कहै रे, बुरी जु लागै तोय ।
लाख बात की बात है रे, ‘द्यानत’ ज्यों सुख होय ॥
रे भाई! करुना जान रे ॥४॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)
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