ओ जीवड़ा तू थारी
ओ जीवड़ा तू थारी करणी रो, फल इक दिन पावेलो
पापां रो बांध्योड़ो बोझो, थारे सागै जावेलो ।।टेक।।
चार दिना री चाँदनी जे, फिर अँधेरी रात
आयु पल पल बीतै छै जी - २, मत ना भूलो या बात ।।ओ।।
भाई बंधु साथी सगलां, कोई न साथै जाय
जीव अकेलो अवतरयो जी - २, और अकेलो जाय ।।ओ।।
जो जैसी करनी करे जी, वैसो ही फल पाय
पाप करयां दुःख ही मिले जी -२, जिनवाणी बतलाय ।।ओ।।
स्रोत: जैन भजन पूजा पाठ, पृष्ठ २३१
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