लाल कैसे जावोगे, असरनसरन कृपाल
लाल कैसे जावोगे, असरनसरन कृपाल ।।टेक.।।
इक दिन सरस वसंतसमय में, केशव की सब नारी ।
प्रभुप्रदच्छनारूप खड़ी हैं, कहत नेमिपर वारी ।।१।।लाल. ।।
कुंकुम लै मुख मलत रुकमनी, रंग छिरकत गांधारी ।
सतभामा प्रभुओर जोर कर, छोरत है पिचकारी ।।२।।लाल. ।।
व्याह कबूल करो तौ छूटौ, इतनी अरज हमारी ।
ओंकार कहकर प्रभु मुलके, छांड दिये जगतारी ।।३।।लाल. ।।
पुलकितवदन मदनपित्-भामिनि, निज निज मदन सिधारी ।
‘दौलत’ जादववंशव्योम शशि, जयौ जगत् हितकारी ।।४।।लाल. ।।
Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ ९४