लागा आतमरामसों नेहरा | Laga Aatamramson Nehara

लागा आतमरामसों नेहरा

लागा आतमरामसों (मारो) नेहरा ॥टेक॥

ज्ञानसहित मरना भला रे, छूट जाय संसार ।
धिक्क! परौ यह जीवना रे, मरना बारंबार ।
लागा आतमरामसों नेहरा ॥१॥

साहिब साहिब मुंहतैं कहते, जानैं नाहीं कोई ।
जो साहिबकी जाति पिछानैं, साहिब कहिये सोई ।
लागा आतमरामसों नेहरा ॥२॥

जो जो देखौ नैनोंसेती, सो सो विनसै जाई ।
देखनहारा मैं अविनाशी, परमानन्द सुभाई ।
लागा आतमरामसों नेहरा ॥३॥

जाकी चाह करैं सब प्रानी, सो पायो घटमाहीं ।
‘द्यानत’ चिन्तामनि के आये, चाह रही कछु नाहीं ।
लागा आतमरामसों नेहरा ॥४॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)

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