ज्ञान ही आत्म साधक का आख्यान है
ज्ञान ही आत्म साधक का आख्यान है ।
ज्ञान ही आत्मा, ज्ञानमय आत्मा ।
ज्ञान बिन आत्मा का, नहीं मान है ।।1।।
ज्ञान ही राग के नाश का है यतन ।
ज्ञान ही आत्म प्राप्ति का सुन्दर जतन ।।2।।
ज्ञान शिवमार्ग है, ज्ञान शिव रूप है ।
ज्ञान ही ध्येय है, ज्ञान ही ध्यान है ।।3।।
ज्ञान ही ज्ञान में ही प्रतिष्ठित सदा ।
ज्ञान पर सन्मुख हो ये ही कुज्ञान है ।।4।।
ज्ञान में मरण ना, ज्ञान शाश्वत शरण ।
ज्ञान तारण-तारण, ज्ञान ही शान है ।।5।।
स्रोत: जिनवाणी भक्ति, पृष्ठ ९२