(जंगला)
इस विधि कीने करम चकचूर-सो विधि बतलाऊँ तेरा।
भरम मिटाऊँ बीरा, इस विधि कीने करम चकचूर ॥टेर ॥
सुनो संत अर्हंत पंथ जन, स्वपर दया जिस घट भरपूर ।
त्याग प्रपंच निरीह करै तप, ते नर जीते कर्म करूर ॥१॥
तोड़े क्रोध निठुरता अघ नग, कपट क्रूर सिर डारी घूर ।
असत अंग कर भंग बतावे, ते नर जीते कर्म करूर ॥२॥
लोभ कंदरा के मुख में भर, काठ असंजम लाय जरूर।
विषय कुशील कुलाचल फूँके, ते नर जीते करम करूर ॥३॥
परम क्षमा मृदुभाव प्रकाशे, सरल वृत्ति निरवांछक पूर।
धर संजम तप त्याग जगत सब, ध्यावैं सत चित केवलनूर ॥४॥
यह शिवपंथ सनातन संतो, सादि अनादि अटल मशहूर ।
या मारग ‘नैनानन्द’ हु पायो, इस विधि जीते कर्म करूर ॥५॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ५ (विभिन्न कवियों के भजन)
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