इस नगरी में किस विधि रहना
(राग सोहनी)
इस नगरी में किस विधि रहना,
नित उठ तलब लगाबेरी सहैना ॥टेर ॥
एक कुवे पाँचों पणिहारी,
नीर भरै सब न्यारी न्यारी ॥१॥
बुर गया कुवा सूख गया पानी,
बिलख रही पाँचों पणिहारी॥२॥
बालू की रेत ओसकी टाटी,
उड़ गया हंस पड़ी रही माटी ॥३॥
सोने का महल रूपे का छाजा,
छोड़ चले नगरी का राजा ॥४ ॥
‘घासीराम’ साँझ का मेला,
उड़ गया हाकिम लुट गया डेरा ॥५॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २१ (विभिन्न कवियों के भजन)