हम आये हैं जिनभूप! तेरे दरसन को | Hum Aaye Hain Jinbhoop! Tere Darsan Ko

हम आये हैं जिनभूप! तेरे दरसन को

हम आये हैं जिनभूप! तेरे दरसन को

निकसे घर आरतिकूप, तुम पद परसनको॥हम. ॥१॥

वैननिसों सुगुन निरूप, चाहैं दरसनकों॥हम.॥२॥

‘द्यानत’ ध्यावै मन रूप, आनँद बरसन को ॥हम.॥३॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ८६

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अर्थ

हे जिनराय। हम आपके दर्शन करने को आए हैं। उस घर से बाहर निकलकर जो दुःखों का कुआँ हैं, हम तेरे पद का, तेरे चरण-कमल का स्पर्शन करने आए हैं। हे अरूपी ! हम वचनों से आपका गुण-स्तवन करते हैं और आपके रूप के दर्शन की कामना करते हैं। द्यानतराय कहते हैं कि मन में आपका ध्यान-चिंतवन करते हैं, तब आनंद बरस पड़ता है अर्थात् मन आनन्द से भर-भर जाता है।

स्रोत: द्यानत भजन सौरभ, पद 219।

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