होली खेले अकेले रे वन में | Holi Khele Akele Re Van Mein

तर्ज : होली खेले रघुवीरा अवध में

होली खेले अकेले रे वन में, होली खेले मुनि वन में,
होली खेले मुनिराज रे वन में, होली खेले मधुवन में ।
होली खेले मुनि वन में अकेले, होली खेले मधुवन में ।। टेक ।।

होली खेले अकेले रे वन में …
चैतन्य गुफा माँहि मुनिवर की कुटिया - 2,
अष्ट कर्म के भूत भगाये - 2,
उपसर्गों ऽऽऽ का, अग्नि दहन किया - 2 ।
ज्ञान गुलाल उड़ाये रे वन में, होली खेले मधुवन में ।। 1 ।।
होली खेले अकेले रे वन में …
पिता-पुत्र जाहिं मुनि जिन की छँईया - 2,
रत्नत्रय के रथ पे चढ़के - 2,
मुक्तिवधु ऽऽऽ का, मुनि ने वरण किया - 2 ।
केवलज्ञान लिया रे क्षण में, होली खेले मधुवन में ।। 2 ।।
होली खेले अकेले रे वन में …
दीक्षा की नहीं तोरी उमरिया,
कुन्द-कुन्द से बोली मईया,
पंच परमागम रच करके - 2,
भव्य जीवों ऽऽऽ को, जिनामृत पिला दिया - 2,
भव से पार लगाये रे वन में, होली खेले मधुवन में ।। 3 ।।
होली खेले अकेले रे वन में …
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स्रोत: जिनवर भक्ति शतक (सामूहिक जिनेन्द्र पूजन समिति, कोटा)
संकलन: विक्रान्त कुमार जैन · सम्पादन: डॉ. वैद्य दीपक जैन