हो प्यारा चेतन अब तो संभारो ज्ञान गुण धारो रे
(राग परज)
हो प्यारा चेतन अब तो संभारो ज्ञान गुण धारो रे ॥टेर ॥
या पुद्गल संग बहुत लुभायो, यो नहीं छै तिहारो ॥१॥
तू चेतन, ज्ञान गुण रूपी, आपो आप संभारो रे ॥२॥
मन, वच, तन, कर माहीं देखो, शुद्ध स्वरूप तिहारो रे ॥३॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २४ (विभिन्न कवियों के भजन)