हो जिनवानी जू, तुम मोकौं तारोगी ।। टेक ।।
आदि अन्त अविरुद्ध वचन तैं, संशय भ्रम निरबारोगी ।। 1 ।।
ज्यौं प्रतिपालत गाय बत्स कौं, त्यों ही मुझकों पारोगी । ।2।।
सनमुख काल बाघ जब आवै, तब तत्काल उवारोगी ।।3।।
‘बुधजन’ दास बीनवै माता, या विनती उर धारोगी।।4।।
उलझि रह्यौ हूँ मोह जाल में, ताकौ तुम सुरझारोगी ।।5।।
Artist: बुधजन
स्रोत: भक्ति-भावना (प्रथम खण्ड)
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ९०