हो जागो जी चेतन अबतो सवेरो मोह नींद विसारोजी
(राग परज)
हो जागो जी चेतन अबतो सवेरो मोह नींद विसारोजी ॥टेर ॥
काल अनन्त बीते अब सोते, अबतो ग्रंथि विदारोजी ॥१॥
नर भव पायो, सैनी कहायो, अब गुरु बैन चितारोजी ॥२॥
लब्धि देशना मिली भाग्य से, रसपति करण संभारोजी ॥३॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २५ (विभिन्न कवियों के भजन)
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