होड़ लगी है होड़ लगी, प्रभु भक्ति की होड़ लगी | ho da lagi hai ho da lagi prabhu bhakti ki ho da lagi

तर्ज : रेल चली भई रेल चली …

होड़ लगी है होड़ लगी, प्रभु भक्ति की होड़ लगी।

महाभाग्य से अवसर आया, सबके मन में आनन्द छाया ।। टेक ।।

प्रभु भक्ति बिन जीवन निष्फल, विषय-कषायों में जाता।
पाप पोटली सिर से बाँधे, मूरख पीछे पछताता।। 1।।

धन की शोभा दान से, शास्त्र श्रवण से कान।
तीरथ वंदे पग सफल, आत्मज्ञान से ज्ञान।। 2।।

अध्रुव को ध्रुव जानकर, हुआ बहुत हैरान।
समयसार जाने जभी, लगे असार जहान।। 3।।

नीर न निकले कूप से, वहीं व्यर्थ सड़ जाय।
दान दिए बिन मूढ़ धन, यहीं पड़ा रह जाय।। 4।।

धन्य प्रभो ! दर्शन हुए, पाई शिवपुर राह।
सर्व समर्पण प्रभु चरण, रही न किंचित् चाह ।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १४१ से १४२
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

खोज: होड लगी है होड लगी, प्रभु भक्ति की होड लगी, होड़ लगी है होड़ लगी, प्रभु भक्ति की होड़ लगी