हे पार्श्व प्रभो आदर्श रहो | He Parshva Prabho Adarsh Raho

तर्ज: हे वीर तुम्हारे द्वारे पर …

आदर्श रहो-आदर्श रहो, हे पार्श्व प्रभो आदर्श रहो।

ज्ञायक हूँ ज्ञायक सहज रहूँ, हे पार्श्व प्रभो आदर्श रहो ।। टेक ।।

निर्मोह रहूँ निष्क्रोध रहूँ, निर्मान रहूँ निर्माया रहूँ।
निर्लोभ रहूँ नीराग रहूँ, हे पार्श्व प्रभो आदर्श रहो।। 1।।

निर्ग्रन्थ रहूँ निर्द्वन्द्व रहूँ, निष्काम रहूँ निष्कर्म रहूँ।
कृतकृत्य रहूँ नित तृप्त रहूँ, हे पार्श्व प्रभो आदर्श रहो ।। 2 ।।

निरपेक्ष निराकुल सदा रहूँ, निज से ही वैभववान रहूँ।
निज प्रभुता से प्रभु रूप रहूँ, हे पार्श्व प्रभो आदर्श रहो ।। 3 ।।

आनन्दमग्न हूँ मंगलमय, परिशुद्ध शुद्ध उपयोगमय।
नित ब्रह्मरूप रहूँ चित्स्वरूप, हे पार्श्व प्रभो आदर्श रहो ।। 4 ।।

Artist: ब्र. श्री रवीन्द्र जी ‘आत्मन्’


स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु, पृष्ठ ११५

1 Like