हे कुंद-कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया | He Kund Kund aapne sachcha path dikha diya

हे कुंद कुंद आप ने सच्चा पथ दिखा दिया
हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया

दृष्टि का विषय मेरी दृष्टि में बिठा दिया

हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया
हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया

शुद्धात्मा के ध्यान से मुक्ति मिले सदा
शुद्धात्मा के ध्यान से मुक्ति मिले सदा
हूँ ज्ञान मात्र आत्मा पर भाव से जुदा

आराधना के काल में
आराधना के काल में
आराध्य बना दिया

हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया
हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया

मुक्ति में जो भी जाएंगे या आज तक गए
मुक्ति में जो भी जाएंगे या आज तक गए
सम्यकत्व का महात्म है अब और क्या कहे

मेरे ही ब्रह्म भाव को
मेरे ही ब्रह्म भाव को
ब्रह्मा बना दिया

हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया
दृष्टि का विषय में मेरी दृष्टि में बिठा दिया
हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया
हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया

थी भूल एक मूल में पर्याय दृष्टिकी
थी भूल एक मूल में पर्याय दृष्ट की
अहो द्रव्य दृष्टि की निधि मुझे आप से मिली

भोगों की भीड़ में मुझे
भोगों की भीड़ में मुझे
योगी दिखा दिया

हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया
हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया

हूँ धन्य धन्य आज मुझे समकित भवन मिला
हूँ धन्य धन्य आज मुझे समकित भवन मिला
जिसमें ना कोई अप्रमत्त नाही प्रमत्त मिला

तिरोभाव कर विशेषों का
तिरो भाव कर विशेषों का
सामान्य दिखा दिया

हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया
दृष्टि का विषय मेरी दृष्टि में बिठा दिया
हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया
हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया

हे कुंद कुंद आपने सच्चा पथ दिखा दिया
सच्चा पथ दिखा दिया …

रचनाकार एवं स्वर : श्री संजीव जी उस्मानपुर

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