हे ज्ञान.... हे ज्ञान | He Gyan He Gyan

हे ज्ञान… हे ज्ञान… - 2

बन्ध से छुड़ाता, मुक्ति दिलाता।
हम से तुम्हारा, तादात्म्य नाता॥
सारे जग को तू ही जान… हे ज्ञान…॥1॥

तेरे ही सहारे, जग से हैं न्यारे।
कर्तापन का, भार उतारें॥
हो जाए भेद विज्ञान… हे ज्ञान…॥2॥

सबका ज्ञाता, निज में समाता।
शुद्धात्मा को, लक्ष्य बनाता॥
होते सम्यक् ज्ञान… हे ज्ञान…॥3॥


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ १९७