हरष हरष गुण गायेंगे, परम प्रभु को ध्यायेंगे | Haras Haras Gun Gayemge Param Prabhu Ko Dhyayemge

तर्ज : चाह जगी जिन दरशन की…

हरष हरष गुण गायेंगे, परम प्रभु को ध्यायेंगे ।।टेक ।।

मैं वह हूँ जो हैं भगवान्, ज्ञानमात्र अक्षय गुणखान।
ऐसी श्रद्धा लायेंगे।।परम. ।।1।।

होता नहीं कभी पर रूप, स्वयं सिद्ध चैतन्य स्वरूप।
अनुभव कर सुख पायेंगे।।परम. ।।2।।

ज्ञान नहीं है ज्ञेयाश्रित, आनन्द नहीं है विषयाश्रित।
निज में तृप्त रहायेंगे।। परम. ।।3।।

देखो प्रभु! आदर्श अनूप, प्रगटायें निर्ग्रन्थ स्वरूप।
विषय विकार भगायेंगे।।परम. ।।4।।

धारें प्रभुवर ऐसा ध्यान, कर्मों का होवे अवसान।
भय भी हमसे भय खायेंगे।। परम. ।।5।।

चित्स्वरूप में नहीं शंका, नहीं विभावों की चिन्ता ।
निश्चय ही शिव पायेंगे।। परम. ।।6।।

महाभाग्य से नाथ मिले, देखत अन्तर सुगुण खिले ।
सहजहिं शीश नवायेंगे ।।परम. ।।7।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’