दीपावली क्या करें क्या न करें | Deepawali Kya Karen Kya Na Karen

दीपावली क्या करें क्या न करें

छपा स्रोत: वात्सल्य रत्नाकर, पृ. ४५२

दीपावली के अवसर पर विचारणीय बिंदु।
पूर्ण पाठ नीचे दिया है, मूल PDF (1 पृष्ठ) सबसे नीचे संलग्न।


दीपावली क्या करें क्या न करें ।

दीपावली के अवसर पर विचारणीय बिंदु गोवर्द्धन पूजन - वात्सल्य रत्नाकर पृ-४५२ गो = जिनवाणी वर्द्धन = प्रगटना । गोतम स्वामी की वाणी प्रगटी । सप्त पूता अर्थात् सप्त भंग । दीवाली के बाद हिन्दू गोवर एवं सप्तपूता की पूजा करते हैं । वह जैनों की देखादेखी प्रतीकात्मक पूजन है । हम तो जिनवाणी एवं उसके सप्त भंग की पूजन करते हैं । विचार कीजिए वीर प्रभु का निर्वाणोत्सव पर्व है न कि दीपावली या दिवाली । न करें रात्री ४ बजे से जल भरना पूजा सामग्री धोना पूजा करना यह सब रात्रि पूजन का दोष है । दिन निकलने पर ही सारे आरम्भ पूजन उत्सव होना चाहिए । हाँ जागकर निर्वाण भक्ति , महावीराष्टक आदि पढने चाहिए । भगवान का निर्वाण जाने का पावापुरी का दृश्य का ध्यान करके रूप्स्थ ध्यान सफल करना चाहिए । मिठिया बूंदी के लड्डू नहीं चढाना चाहिए । पहले स्वाध्याय के अभाव में इनके चढाने की परम्परा थी । बाद में मात्र शकर के लड्डू चलन में आये । परन्तु लड्डू गिरने से पूरे मंदिर में चींटियाँ हो जाती है जिससे उस दिन बहुत हिंसा होती है । नारियल का छिला गोला चढ़ाना सही है । प्रातः काल या अन्य समय में भी फटाके नहीं फोड़ना चाहिए । साय/ रात्री काल में किसी की भी द्रव्य से पूजन गृहीत मिथ्यात्व है । वही खाते, मिठाइयां, चांदी के सिक्के या मिटटी की पुतली पूजना या किसी भी विधि से पूजा करणा । मात्र भक्ति की जा सकती है । आज तो महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक है अतः आज के दिन तो मन्दिर भरे होने चाहिए । अच्छा हो कि हम ५-७ दिन का कोई सुंदर तात्विक आयोजन जैसे विधान , प्रवचन, महावीर कथा वाचन करा लें । सार्वजनिक सभा का आयोजन किया जा सकता है । कथा आधारित प्रतियोगिता , प्रश्न मंच चला सकते हैं । भजन बनाओ , पेंटिंग स्पर्धा आदि कई कार्य आयोजित किये जा सकते हैं । स्कूल बाजार समाज में फटाके न चलाबें ऐसा अभियान चलाबें । मन्दिर में दिया नहीं लगाना । हां मन्दिर की साज सज्जा अवश्य की जावें । विद्युत् माला लगाई जा सकती है । हिंसा न हो इसका ध्यान रखें । बाजार की मिठाइयां खरीदी खाई या भेंट में न दी जावें । आज त्याग संयम से रहना चाहिए । अहिंसा त्याग वैराग्य का पर्व है । मन्दिर में सफाई पुताई के नाम पर अजैनों (मांसाहारी, अस्पर्शी शुद्र आदि) का प्रवेश न हो, समाज स्वयं अपने हाथों से यह काम कर सकती है । सारे युवक युवतीयां महिला पुरुष एक दिन में मन्दिर की सारी सफाई कर सकते हैं । जिन प्रतिमाओं का मंजन करना चाहिए । साथ ही सिंहासन, क्षत्र, चंवर भी संवारने चाहिए । नये वरतन से पूजा करें । दोंचा लगे हुए पुराने वर्तन काम में नहीं लेकर हटा देना चाहिए । नये वस्त्र पूजन में शामिल करें । ध्वजा नयी लगा देवें । पुरानी ध्वजा जलाकर विसर्जित कर देनी चाहिए । यहाँ वहां लापरवाही से फेकना नहीं चाहिए । हाथों से सिलकर कपड़े की या कागज की झंडियों से मन्दिर सजना चाहिए । बच्चों को लगना चाहिए कि यह हमारा ही पर्व है ।


:paperclip: मूल दस्तावेज़ (PDF):

स्रोत: Jain Granth E Library (Telegram), t.me/jainegranth/55931।

खोज: Dipawali Kya Karen Kya Na Karen