तर्ज : लहरायेंगे …
आयेंगे हम आयेंगे, प्रभु दर्शन को आयेंगे ।
प्रभु दर्शन से निज दर्शन कर, जीवन सफल बनायेंगे। ।टेक ।।
प्रभु का रूप हमें है भाया, अपना ज्ञायक रूप सुहाया।
निज सुख निज में पायेंगे ।।1।।
क्रोधादिक भासे दुःखदायी, वीतरागता हमें सुहायी।
निज पुरूषार्थ बढ़ायेंगे । ।2।।
इन्द्रिय सुख तो तुच्छ हेय है, सुःख अतीन्द्रिय उपादेय है।
प्रभु उदासीनता लायेंगे ।।3।।
मिथ्या जग प्रपंच ठुकराकर, अंतर में वैराग्य बढ़ाकर ।
निर्ग्रन्थ पद अपनायेंगे । । 4 ।।
भावें नित वैराग्य भावना, शुद्धातम की करें साधना।
कर्म कलंक नशायेंगे ।।5।।
निश्चय आवागमन मिटावें, निजप्रभुता निज में प्रगटावें।
शाश्वत मुक्त रहायेंगे ।।6।।
स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’