अवसर आया है सुखदाय, ज्ञायक भाव भजो हर्षाय | Avasar Ay Hai Sukhaday Jnayak Bhav Bhajo Harsay

तर्ज : रोम रोम पुलकित…

अवसर आया है सुखदाय, ज्ञायक भाव भजो हर्षाय।

जन्म-मरण का दुःख नशाय, ज्ञायक भाव भजो हर्षाय । ।टेक ।।

जिनवर दर्श मिला अविकार, जिनवाणी पायी सुखकार।
अमृतमय जिनशासन पाय, ज्ञायक भाव भजो हर्षाय ।।। ।।
पर भावों से सहजहिं भिन्न, निज भावों से सदा अभिन्न।
होकर के अन्तर्मुख भाय, ज्ञायक भाव भजो हर्षाय ।।2।।

बिन जाने दुख सहे अपार, देखत हो सुख अपरम्पार।
अविनाशी प्रभुता प्रगटाय, ज्ञायक भाव भजो हर्षाय ।।3।।

अन्य विकल्प न करने योग्य, परम भाव ही भजने योग्य ।
एकहि साधें सब सध जाय, ज्ञायक भाव भजो हर्षाय ।। 4 ।।

देखो एक ज्ञान में ज्ञान, वर्ते सहजहिं निर्मल ध्यान।
क्षण में कर्म कलंक नशाय, ज्ञायक भाव भजो हर्षाय ।।5।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’