अवधू सूतां क्या इस मठ में
अवधू, सूतां, क्या इस मठ में ॥टेक॥
इस मठ का है कबन भरोसा,
पड़ जावे चटपट में ॥अवधू…१॥
छिन में ताता, छिन में शीतल,
रोग-शोक बहु घट में ॥अवधू…२॥
पानी किनारे मठ का वासा,
कवन विश्वास ये तट में ॥अवधू…३॥
सूता सूता काल गमायो,
अजहुँ न जाग्यो तू घट में ॥अवधू…४॥
घरटी फेरी आटौ खायो,
खरची न बांची वट में ॥अवधू…५॥
इतनी सुनि निधिचारित मिलकर,
‘ज्ञानानन्द’ आये घट में ॥अवधू…६॥
Artist: पं. ज्ञानानन्द जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं ज्ञानानन्द कृत भजन)
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