अति अद्भुत प्रतिमा देख प्रभो, आनन्द हृदय में छाया है | Ati Adbhut Pratim Dekh Prabho Anand Hrday Mem Chay Hai

तर्ज : दरबार तुम्हारा मनहर है…

अति अद्भुत प्रतिमा देख प्रभो, आनन्द हृदय में छाया है।

अति पावन प्रतिमा देख प्रभो, स्मरण आपका आया है।। टेक ।।

नासा दृष्टि सुखकारी है, निष्काम दशा अविकारी है।
बिन वस्त्राभूषण भी सुन्दर, आनन्द हृदय में छाया है ।।1।।

मानो समवशरण ही उतरा, प्रभो हमारे आँगन में।
हे वीतराग, हे तेजपुंज, आनन्द हृदय में छाया है ।।2।।

बिन बोले बोल रही स्वामी, निज ज्ञायक भाव दिखाय रही।
शिवरूप सहज चिद्रूप निरख, आनन्द हृदय में छाया है।।3।।

ऐसी अपनी प्रभुता देखी, निष्काम हुआ सन्तुष्ट हुआ।
प्रभु सम ही आत्म लीनता हो, आनन्द हृदय में छाया है।।4।।

हो भक्ति भाव से नाथ नमन, हो सहज स्वयं का अभिनन्दन ।
निर्द्वन्द निराकुल आह्लादित, आनन्द हृदय में छाया है।।5।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’