आश्रय योग्य उपादेय जानो, केवल शुद्धातम | Asray Yogy Upadey Jano Keval Suddhatam

आश्रय योग्य उपादेय जानो, केवल शुद्धातम।

केवल शुद्धातम, जानो अपनो शुद्धातम ।। टेक ।।

सहज पूज्य शुद्धात्मा, सहजानन्द स्वरूप ।
तीन भुवन में सार निज, चिदानंद चिद्रूप।।आश्रय. ।।1।।

महाभाग्य पायो सहज, परम धर्म को मर्म ।
स्वानुभूति ही विश्व में, आनंददायक धर्म ।। आश्रय. ।।2।।

आत्मज्ञान ही ज्ञान है, मंगलमय अविकार।
आत्म ध्यान से शीघ्र ही सहज होय भवपार ।। आश्रय. ।।३ ।।

यही भावना है प्रभो ! वर्ते सहज विवेक ।
होवे आतम-लीनता, और चाह नहीं शेष ।। आश्रय. ।।4।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’