अरे मन बनिया बान न छोड़े
(राग सोहनी)
अरे मन बनिया बान न छोड़े॥टेर ॥
पाँच पाट को जामो पहस्यो ऐंठ्यो ऐंठ्यो ऐंठ्यो डोलै ।
जन्म जन्म को मारयो कूट्यो तोहु साँच न बोलै ॥१॥
घर में थारे कुमति बननिया छिन छिन में चित चौरे ।
कुटुंब थारो ऐसो हरामी, अमृत में विष घोलै ॥२॥
पूरा बाट मांहि सरकावै घटती बाट टटोलै।
पासंग में चतुराई राखे पूरा कबहु न तोलै ॥३॥
चींथी लिख लिख बही बनाई कूडा लेखा जोडै ।
कहत बनारस इनसे डरियो कपट गांठि नहिं खोलै ॥४ ॥
Artist: पं. बनारसीदास जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २२ (विभिन्न कवियों के भजन)