अरे हाँ रे तैं तो सुधरी बहुत बिगारी | Are Haan Re Tain To Sudhari Bahut Bigari

अरे हाँ रे तैं तो सुधरी बहुत बिगारी

(राग गौड़ी ताल)

अरे हाँ रे तैं तो सुधरी बहुत बिगारी ॥अरे. ॥टेक ॥

ये गति मुक्ति महलकी पौरी, पाय रहत क्यौं पिछारी॥१॥अरे. ॥

परकौं जानि मानि अपनो पद, तजि ममता दुखकारी।
श्रावक कुल भवदधि तट आयो, बूड़त क्यौरे अनारी ॥२ ॥अरे. ॥

अबहूँ चेत गयो कुछ नाहीं, राखि आपनी बारी ।
शक्ति समान त्याग तप करिये, तब बुधजन सिरदारी ॥३॥अरे. ॥


Artist: पं. बुधजन जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ६

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