प्रूफरीडिंग बाकी है
ये बोल रिकॉर्डिंग से मशीन द्वारा लिखे गए हैं, इनमें अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
अपनो जानके तारो स्वामी मोहे।
जगत् उजागर करुणा सागर,
नागर नुत निहारो स्वामी मोहे।।1।।
भव अटवी में भटकत भटकत,
मैं अब अति ही हारो प्रभु मोहे।।2।।
भागचंद स्वच्छंद ज्ञान में,
सुख अनंत बिस्तारो प्रभु मोहे।।3।।
रचयिता : कविवर भागचंद जी
स्वर : पण्डित श्री मांगीलाल जी, कोलारस
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स्रोत: JinSwara ऑडियो संग्रह।