अपनी सुधि पाय आप | Apani Sudhi Pay Ap

अपनी सुधि पाय आप

अपनी सुधि पाय आप, आप यों लखायो ।।टेक।।

मिथ्यानिशि भई नाश, सम्यक् रवि को प्रकाश
निर्मल चैतन्य भाव, सहजहिं दर्शायो ।।
ज्ञानावर्णादि कर्म, रागादि मेटे भर्म
ज्ञानबुद्धि तें अखंड, आप रूप थायो ।।

सम्यकदृग ज्ञान चरण, कर्ता कर्मादि करण
भेदभाव त्याग के, अभेद रूप पायो ।।
शुक्लध्यान खड्ग धार, वसु अरि कीने संहार
लोक अग्र सुथिर वास, शाश्वत सुख पायो ।।


स्रोत: जैन भजन पूजा पाठ, पृष्ठ २२३