आओ हम सब मिल आज, जिनवर भक्ति करें | ao hama saba mila aja jinavara bhakti karem

तर्जः जिनवाणी अमृत…

आओ हम सब मिल आज, जिनवर भक्ति करें ।। टेक।।

भक्ति करत सब पाप कटत हैं, पाप कटत हैं, पुण्य बढ़त है।
भेद-विज्ञान प्रगटाय ।। जिनवर. ।। 1 ।।

परिणति रागादिक से न्यारी, प्रभुता प्रभु की मंगलकारी।
अद्भुत सुख उपजाय ।। जिनवर. ।। 2 ।।

हरष-हरष प्रभु के गुण गावें, गुण गावें, आनंद मनावें।
धर्म प्रभावना बढ़ाय।। जिनवर. ।। 3 ।।

प्राणिमात्र प्रति मैत्री भाव, साधर्मी प्रति प्रीति भाव।
सहज रूप दरशाय ।। जिनवर. ।। 4 ।।

दुखीजनों पर करुणा धार, भिन्नों प्रति माध्यस्थ सम्हार।
आराधन चित लाय ।। जिनवर. ।। 5 ।।

भाव सहित हम शीस नवावें, सम्यक् तत्त्व भावना भावें।
आवागमन मिटाय ।। जिनवर. ।। 6 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ५०
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’