आओ भवि जिनवर की भक्ति करेंगे, भक्ति करेंगे, वाणी सुनेंगे | ao bhavi jinavara ki bhakti karemge bhakti karemge vani sunemge

तर्जः चलो-चलो मंदिर में दर्शन करेंगे …

आओ भवि जिनवर की भक्ति करेंगे, भक्ति करेंगे, वाणी सुनेंगे।। टेक ।।

वीर प्रभु ने केवल पायो, छियासठ दिन नहिं अवसर आयो।
श्रावण वदी एकम दिन पावन करेंगे।। आओ. ।। 1।।

अवधिज्ञान से इन्द्र जानकर, नहीं सभा में कोई गणधर ।
गौतम द्विज प्रभु के गणधर बनेंगे ।। आओ.।। 2।।

पूछा अर्थ इन्द्र इक पद का,समझे न विप्र चढ्यो रस मद का।
बोले तेरे गुरु से हम चर्चा करेंगे।। आओ. ।। 3।।

मानस्तंभ देख समकित लह, सप्त ऋद्धि अरु चार ज्ञान सह ।
हुए गणी हमको अब, तत्त्व कहेंगे ।। आओ. ।। 4।।

खिरी दिव्यध्वनि अविरल रूप से, काढ़नहारी संसार कूप से।
सार प्रवचन का समाधि में रहेंगे ।। आओ. ।। 5।।

परम्परा दिगम्बर से आई जो वाणी, आज भी सुनाएँ यहाँ सम्यक् ज्ञानी।
वाणी को सुनकर तत्त्व निर्णय करेंगे।। आओ.।। 6।।

तत्त्वों के निर्णय से सम्यक्त्व पाकर, ज्ञानमयी चारित्र अपनाकर।
शुक्लध्यान द्वारा परमात्मा बनेंगे ।। आओ. ।। 7।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १३२ से १३३
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ १६० से १६१