आओ भाई मंगलमय निज शुद्धातम को ध्यायें | Ao Bhai Mamgalamay Nij Suddhatam Ko Dhyayem

तर्ज-गाथा आतम राम की…

आओ भाई मंगलमय निज शुद्धातम को ध्यायें।

भव दुखहारी शिव सुखकारी रत्नत्रय प्रगटाएं। ।टेक ।।

संयोगों से अति ही न्यारा, ज्ञान शरीरी अविकारी।
द्रव्य-भाव कर्मों से न्यारा, सहज परम प्रभुता धारी ।।
अन्तर्मुख हो निर्विकल्प हो, अक्षय प्रभुता पायें ।।1।।

स्वामीपन तो मिथ्या ही है, कर्त्तापन भी झूठा।
पर से कुछ सम्बंध नहीं है, मिथ्या भ्रम सब टूटा।।
स्व-स्वामी सम्बंध अहो ! निज अंतर में ही पायें ।।2।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’