तर्ज : झंडा ऊँचा…
आओ-आओ प्रभु गुण गायें, प्रभुभक्ति कर शिवपथ पायें।
समता का अभ्यास बढ़ायें, अपना जीवन सफल बनायें।।टेक।।
प्रभुवर का उपकार अलौकिक, दर्शाये हैं तत्त्व अलौकिक।
तत्त्वों को समझें समझायें, परम तत्त्व की श्रद्धा लायें।।1।।
प्रभुवर की मूरति अविकारी, नासादृष्टि महा सुखकारी।
हम भी अन्तर्मुख हो जायें, परम प्रभु का दर्शन पायें।।2।।
नष्ट हुए अष्टादश दोष, प्रभुवर हुए परम निर्दोष।
दोष दृष्टि को सहज नशायें, हम भी वीतराग हो जायें।।3।।
प्रभुवर का है ज्ञान अनन्त, दर्श अनन्त वीर्य अनन्त।
प्रभु सम आतम ध्यान लगायें, अनन्त चतुष्टय हम प्रगटायें ।।4।।
प्रभुवर का है मार्ग निराला, रत्नत्रयमय आनन्द वाला।
प्रभु चरणों में शीश नवायें, अनुगामी हो शिवपद पायें ।।5।।
स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’