आओ आओ मिलकर आओ, जिनमंदिर में आज रे | ao ao milakara ao jinamamdira mem aja re

तर्ज : चाल म्हारा…

आओ आओ मिलकर आओ, जिनमंदिर में आज रे।

देखो ! अद्भुत धर्म महोत्सव, जिनमंदिर में आज रे।। टेक ।।

मूरति प्रभुवर की मनहारी, गंध कुटी की शोभा न्यारी।
शोभे तीन छत्र सिर ऊपर, तीन लोक सिरताज रे।। 1।।

ढुरते चमर सहज सिखलावें, जो जिनवर को शीस नवावे ।
भेदज्ञान करते शिव पावे, होवे जय-जयकार रे।। 2।।

प्रभु मूरति से शान्ति बरसती, लखते ही मिथ्यामति भगती ।
अन्तर्दृष्टि सहज ही होती, खुले मुक्ति का द्वार रे।। 3।।

भक्ति भाव से प्रभु गुण गाओ, अपना जीवन सफल बनाओ।
करो स्वानुभव निज पद साधो, यही जगत् में सार रे।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १९
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’