आओ-आओ महावीर, मुक्तिमार्ग दिखाओ | ao ao mahavira muktimarga dikhao

आओ-आओ महावीर, मुक्तिमार्ग दिखाओ।। टेक ।।

मिथ्या मोह अंधेरा छाया, ज्ञान ज्योति प्रगटाओ।
भवरूपी अटवी में भटके, सहज उपाय सुझाओ।। 1।।

नाना कल्पित मत इस जग में, जीवों को भरमावे ।
ज्ञान-क्रिया की मैत्री भूले, पक्ष-विवाद बढ़ावे ।। 2।।

अनेकान्तमय श्री जिनशासन, सबको मंगलकारी।
भेदज्ञान कर सब ही पावें, होवें शिवमगचारी।। 3।।

ज्ञायक रूप अनुभवन होवे, मिथ्या बुद्धि नाशे।
मोह क्षोभ से रहित साम्यमय, धर्म सहज परकाशे।। 4।।

ज्ञानमयी निजरूप हमारा, श्रद्धा ज्ञानमयी हो।
तृप्त स्वयं में तुष्ट स्वयं में, जीवन ज्ञानमयी हो।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १२५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’