आओ-आओ हो जिनालय आओ, प्रभु दर्शन पाओ | ao ao ho jinalaya ao prabhu darshana pao

तर्जः मैंने तेरे ही…

आओ-आओ हो जिनालय आओ, प्रभु दर्शन पाओ।

गाओ-गाओ हो प्रभु गुण गाओ, निज प्रभुता पाओ ।। टेक ।।

जिनमंदिर मुक्ति का मण्डप, समवशरण सम जानो।
सौम्य शान्त छवि लखि प्रभुवर की, अपनो रूप पिछानो ।। 1 ।।

भिन्न असार जानकर पर-पद, निज पद में चित लाओ।
निजानन्द निज में ही पाओ, तृप्त सदैव रहाओ।। 2।।

भूल रहे हो जिस माया में, वह तो साथ न जाये।
जिनकी चिन्ता में व्याकुल, सभी यहीं रह जाये।। 3।।

व्यर्थ नहीं भरमाओ ‘आत्मन्’ उत्तम अवसर आया।
आतम हित का करो सु उद्यम, श्री जिनधर्म है पाया।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १६
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’