अनारी जिया तुझको यह भी खबर है | Anari Jiya Tujhko Yah Bhi Khabar Hai

अनारी जिया तुझको यह भी खबर है

अनारी जिया तुझको यह भी खबर है।
किधर तुझको जाना कहाँ तेरा घर है॥

मुसाफिर है दो चार दिन का यहाँ पे ।
न यह तेरा दर है न यह तेरा घर है ॥

कहो कौन से राह जाना है तुझको ।
तेरे साथ में भी कोई राहबर है॥

है अफसोस न्यामत तू गाफिल है इतना ।
न यहाँ की खबर है न वहाँ की खबर है॥


स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ६२ (विभिन्न कवियों के भजन)