अमोलक मनुष जनम प्यारे | Amolak Manush Janam Pyare

अमोलक मनुष जनम प्यारे

अमोलक मनुष जनम प्यारे, भूल विषयन में मत हारे ॥टेक॥

चौरासी लख योनि में प्यारे, भ्रमत फिरा चहुं ओर ।
नरक स्वर्ग तिर्यंच में प्यारे, पाए दुख अति घोर ॥
कहीं नहीं सुख पायो प्यारे, भूल विषयन में मत हारे ॥१॥

धन दे तन को रखिये प्यारे, तन दे रखिये लाज ।
धन दे तन दे लाज दे प्यारे, एक धरम के काज ॥
योंही मुनिजन कह गए सारे, भूल विषयन में मत हारे ॥२॥

यही धर्म का सार है प्यारे, कर नित पर उपकार ।
तज स्वारथ परमार्थ को प्यारे, भजले बारंबार ॥
‘न्यामत’ हो भवदधि पारे, भूल विषयन में मत हारे
अमोलक मनुष जनम प्यारे, भूल विषयन में मत हारे ॥३॥


Artist: पं. न्यामतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं न्यामतराय कृत भजन)

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