आज का दिवस है मंगलकारी, मंगलकारी-आनंदकारी ॥ टेक ॥
वीतराग प्रभु मंगलकारी, जिनवाणी है मंगलकारी।
निर्ग्रन्थ गुरुवर मंगलकारी, जिनशासन है मंगलकारी ॥ 1 ॥
सम्यग्दर्शन मंगलकारी, सम्यग्ज्ञान है मंगलकारी।
सम्यक् चारित्र मंगलकारी, धर्म अहिंसा मंगलकारी ॥ 2 ॥
जिनमूरति मंगलकारी, जिनमंदिर है मंगलकारी ।
शुद्धातम है मंगलकारी, आराधन है मंगलकारी ॥ 3 ॥
सिद्धचक्र का पाठ रचाया, सबके मन में आनंद छाया।
हरषि-हरषि प्रभु के गुण गावें, प्रभु भक्ति हो मंगलकारी ॥4॥
सुखी रहें सब जीव जगत् में, धर्म प्रेम वृद्धिगंत हो।
नित-नित धर्म महोत्सव होवे, धर्म प्रभावना हो अविकारी ॥5॥
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २६८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’