ऐसी चोसर जो नर खेलै सोही चतुर खिलाड़ी
(राग भैरवी)
ऐसी चोसर जो नर खेलै सोही चतुर खिलाड़ी ॥ टेर ॥
तीन रतन हिरदा में धारे, च्यार तजो दुखदाई ।
पंजडी पडी तजो विषयन की, छकडी दया विचारो रे ॥ १ ॥
पाँच दोय संजम को विचारो, पाँच तीन मद टारो रे ।
नवधा भक्ति छै तीन संभालो धरम छह-चार विचारो रे ॥ २ ॥
ग्यारे प्रतिमा को तुम धारो, द्वादसव्रत सिनगारोरे ।
पोबारा चारित्र संभालो, चोदह गुणस्थानधारोरे ॥ ३ ॥
पंद्रह तो परमाद विडारो सोलाकारण धारोरे ।
सतरा नेम धरम व्रतपालो, अठारे दोष निवारोरे ॥४ ॥
या वानी आनन्द हितकारी, आवागमन निवारोरे ।
जामन मरण मेटो जगनायक मैं छूँ शरण तिहारी रे ॥ ५ ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ३२ (विभिन्न कवियों के भजन)
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