अहो ! अहो ! श्री चन्द्रप्रभो ! हम शरणे आए | aho aho shri chandraprabho hama sharane ae

तर्जः आज हम जिनराज…

अहो ! अहो ! श्री चन्द्रप्रभो ! हम शरणे आए।

आए प्रभु हम आए-आए ।। टेक ।।

तुमको बिन पहिचाने भगवन्, भव-भव में भरमाए।
महाभाग्य से दर्शन पाए, आनन्द उर न समाए।। 1।।

शान्त स्वरूप निरखते स्वामिन्, सब संताप नशाए।
स्व-पर भेद-विज्ञान प्रगट हो, आतम ज्योति जगाए।। 2।।

अनुभव रस से तृप्त हुए प्रभु, इन्द्रिय- विषय न भाए।
नित्य- शुद्ध निज सम्पत्ति पाई, बाहर कुछ न सुहाए।। 3।।

प्रभो! आपके ही प्रसाद से, मुक्तिमार्ग में आए।
सर्व विभाव नशावें सत्वर, अनुपम पद प्रगटाए।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ९४ से ९५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’