आदिप्रभु का, वीरप्रभु का | adiprabhu ka, viraprabhu ka

आदिप्रभु का, वीरप्रभु का, बाहुबलीजी का आयतन ।

मंगलमय रे, मंगलमय रे, कहान गुरु का मंगलायतन ॥ टेक ॥
प्रथम विराजें आदिप्रभुजी, ऋषभदेव सादर वंदन।
ध्यानमात्र से भक्तजनों के, मिटेंगे सब भव दुःख क्रंदन ॥
मंगलमय रे, मंगलमय रे, कहान गुरु का मंगलायतन ॥1 ॥

वर्धमान महावीर जिनस्वामी के चरणों में मेरा वंदन।
चारों गति में भटका हूँ, अब कटेंगे दुःख मेरे प्रतिक्षण ॥
मंगलमय रे, मंगलमय रे, कहान गुरु का मंगलायतन ॥2॥

बाहुबलीजी की शरणा पाकर, धन-धन होंगे हम सब जन।
स्व-पर विवेक जगेगा उर में, मेटेंगे मिथ्यादर्शन ॥
मंगलमय रे, मंगलमय रे, कहान गुरु का मंगलायतन ॥3 ॥

गगनचुम्बी मानस्तंभ प्यारा, विराजें आदिनाथ भगवन्।
दर्शनमात्र से भव्यजनों के, मान गले साधें आतम ॥
मंगलमय रे, मंगलमय रे, कहान गुरु का मंगलायतन ॥4॥

कहानगुरु के मंगलायतन पर, तन-मन-धन सब है अर्पण।
भेदज्ञान की ज्योति जला करूँ निज आतम का अभिनंदन ॥
मंगलमय रे, मंगलमय रे, कहान गुरु का मंगलायतन ॥5॥

कहानगुरु का मंगलायतन रे, बहिनश्री का मंगलायतन।
मंगलमय रे, मंगलमय रे, कहान गुरु का मंगलायतन ॥


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २५५