अद्भुत से भरी अद्भुत प्यारा
अद्भुत से भरी अद्भुत प्यारा ।
शाश्वत आतम देव हमारा ।।टेक।।
स्वयं सिद्ध त्रैकालिक सत् है ।
मरता नहीं किसी का मारा ।।1।।
जहाँ क्लेश प्रवेश न पावे ।
चिन्मय अक्षय सुख भण्डारा ।।2।।
शक्ति अनन्तानन्त भरी हैं ।
गणधर भी नहीं पावे पारा ।।3।।
लोकालोक ज्ञानमय झलके ।
ऐसा ज्ञान अनन्त अपारा ।।4।।
फिर भी एक न विकल्प न उपजे ।
अद्भुत है सुख वीर्य हमारा ।।5।।
हानि वृद्धि की नहीं आशंका ।
एक रूप निर्मल अविकारा ।।6।।
नहीं किंचित् संम्बंध जगत् से ।
ज्ञानमयी ध्रुव धाम हमारा ।।7।।
स्रोत: जिनवाणी भक्ति, पृष्ठ १३१ से १३२