अभिनंदन-वंदन होऽऽऽ
अभिनंदन-वंदन होऽऽऽ अभिनंदन-वंदन
तीर्थधाम मङ्गलायतन में, मंगल अभिवादन
अभिनंदन-वंदन… ।।टेक।।
उद्याचल से भानु जागे,
मोहनिशातम क्षण में भागे ।
जाग रहा चेतन, जाग रहा चेतन
अभिनंदन - वंदन … ।।१।।
अभिनव, नव कलरव ले उर में,
गाऐं पंक्षी मधुरिम स्वर में,
अवसर है पावन, अवसर है पावन
अभिनंदन - वंदन … ।।२।।
सुर तरूओं के पुष्प मनोहर,
दस दिशी में आच्छादित मनहर
महक रहे उपवन, महक रहे उपवन
अभिनंदन - वंदन … ।।३।।
निजकल्याण के हेतु कल्याणक,
बोधि लाभ हो पाऐं सम्यक्
छूटे भव क्रंदन, छूटे भव क्रंदन
अभिनंदन - वंदन … ।।४।।
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०१५), पृष्ठ १५ से १६