अब समझ कही
अब समझ कही …
कौन कौन आपद विषयनितैं, नरक निगोद सही॥अब.॥१॥
एक एक इन्द्री दुखदानी, पांचौं दुखत नहीं॥हम.॥२॥
‘द्यानत’ संजम कारजकारी, धरौ तरौ सब ही ॥हम.॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ८७