अब हम नेमिजी की शरन | Ab Ham Nemiji Ki Sharan

अब हम नेमिजी की शरन

अब हम नेमिजी की शरन ।
और ठौर न मन लागत है, छांडि प्रभु के चरन ॥टेक॥

सकल भवि-अघ-दहन वारिद, विरद तारन तरन ।
इन्द्र चन्द फनिन्द ध्यावै, पाय सुख दुख हरन ॥
अब हम नेमिजी की शरन ॥1॥

भरम-तम-हर-तरनि, दीपति, करम गन खय करन ।
गनधरादि सुरादि जाके, गुन सकत नहि वरन ॥
अब हम नेमिजी की शरन ॥2॥

जा समान त्रिलोक में हम, सुन्यौं और न करन ।
दास द्यानत दयानिधि प्रभु, क्यों तजैंगे परन ॥
अब हम नेमिजी की शरन ॥3॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)

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