अब घर आये चेतनराय, सजनी खेलौंगी मैं होरी
अब घर आये चेतनराय, सजनी खेलौंगी मैं होरी ॥ अब. ॥ टेक ॥
आरस सोच कानि कुल हारी
धरि धीरज बरजोरी ॥ १ ॥ सजनी. ॥
बुरी कुमति बात न बूझै, चितवत है मोओरी ।
वा गुरुजनक बलि बलि जाऊँ, दूरि करी मति भोरी ॥ २ ॥ सजनी. ॥
निज सुभाव जल हौज भराऊँ, घोरूँ निजरङ्ग रोरी ।
निज ल्यौं ल्याय शुद्ध पिचकारी, छिरकन निज मति दोरी ॥ ३ ॥ सजनी. ॥
गाय रिझाय आप वश करिकै, जावन द्यौं नहि पोरी ।
बुधजन रचि मचि रहूँ निरंतर, शक्ति अपूरब मोरी ॥ ४ ॥ सजनी. ॥
Artist: पं. बुधजन जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २३