अब गतियों में नाहीं रुलेंगे । ab gatiyon mein naahin rulenge

अब गतियों में नाहीं रुलेंगे।

अब गतियों में नाहीं रुलेंगे, निजानंद पान करेंगे।

अब भव भव का नाश करेंगें, निजानंद पान करेंगे।
खुद की खुद में ही खोज करेंगें, निजानंद पान करेंगे ॥ अब..

मैं मुझ में पर पर में रहता, निज रस के आनंद में रहता,
अब केवल ज्ञान करेंगें, निजानंद पान करेंगे ॥ अब..

मैं ज्ञायक ज्ञायक ही न जाना, मैं तो हूँ बस सिद्ध के समाना,
अब सिद्धों के बीच रहेंगें, निजानंद पान करेंगे ॥ अब..


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २१५

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