आरसी देखत मन आर-सी लागी
आरसी देखत मन आर-सी लागी
सेत बाल यह दूत कालको, जोवन मृग जरा बाघिनि खागी॥आरसी. ॥१॥
चक्री भरत भावना भाई, चौदह रतन नवों निधि त्यागी॥आरसी.॥२॥
‘द्यानत’ दीक्षा लेत महूरत, केवलज्ञान कला घट जागी॥आरसी.॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ८८
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